Tuesday, 22 August 2017

Computer Output Devices


आउटपुट डिवाइस (Output Device)


 “वे उपकरण जिनके द्वारा कंप्यूटर से प्राप्त परिणामों को प्राप्त किया जाता है आउटपुट डिवाइसेज कहलाते हैं ”

आउटपुट डिवाइस कई प्रकार के होते है |

मॉनीटर (Monitor)

प्रिंटर (Printer)

प्लोटर (Plotter)

प्रोजेक्टर (Projector)

साउंड कार्ड (Sound Card)

इअर फोन(Ear phone)


मॉनीटर(Monitor:-

मॉनीटर(Monitor) एक ऐसा आउटपुट संयंत्र (Output Device) है जो टी.वी. जैसे स्क्रीन पर आउटपुट को प्रदर्शित करता है इसे विजुअल डिस्प्ले यूनिट (Visual Display Unit) भी कहते है मॉनीटर (Monitor) को सामान्यतः उनके द्वारा प्रदर्शित रंगों के आधार पर तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है-


मोनोक्रोम (Monochrome):- यह शब्द दो शब्दों मोनो (Mono) अर्थात एकल (Single) तथा क्रोम (Chrome) अर्थात रंग (Color) से मिलकर बना है इसलिये इसे Single Color Display कहते हैतथा यह मॉनीटर आउटपुट को Black & White रूप में प्रदर्शित (Display) करता है|

ग्रे-स्केल (Gray-Scale):- यह मॉनीटर मोनोक्रोम जैसे ही होते हैं लेकिन यह किसी भी तरह के Display को ग्रे शेडस (Gray Shades) में प्रदर्शित (Show) करता हैं इस प्रकार के मॉनीटर अधिकतर हैंडी कंप्यूटर जैसे लैप टॉप (Laptop) में प्रयोग किये जाते हैं

रंगीन मॉनीटर (Color Monitors):- ऐसा मॉनीटर RGB (Red-Green-Blue) विकिरणों के समायोजन के रूप में आउटपुट को प्रदर्शित करता है सिद्धांत के कारण ऐसे मॉनीटर उच्च रेजोलुशन (Resolution) में ग्राफिक्स (Graphics) को प्रदर्शित करने में सक्षम होते हैं कंप्यूटर मेमोरी की क्षमतानुसार ऐसे मॉनीटर 16 से लेकर 16 लाख तक के रंगों में आउटपुट प्रदर्शित करने की क्षमता रखते हैं

प्रिंटर (Printer):-

प्रिंटर एक ऑनलाइन आउटपुट डिवाइस (Online Output Device) है जो कंप्यूटर से प्राप्त जानकारी को कागज पर छापता है कागज पर आउटपुट (Output) की यह प्रतिलिपि हार्ड कॉपी (Hard Copy) कहलाती है कंप्यूटर से जानकारी का आउटपुट (Output) बहुत तेजी से मिलता है और प्रिंटर (Printer) इतनी तेजी से कार्य नहीं कर पाता इसलिये यह आवश्यकता महसूस की गयी कि जानकारियों को प्रिंटर (Printer) में ही स्टोर (Store) किया जा सके इसलिये प्रिंटर (Printer) में भी एक मेमोरी (Memory) होती है जहाँ से यह परिणामों को धीरे-धीरे प्रिंट करता हैं

“प्रिंटर (Printer) एक ऐसा आउटपुट डिवाइस (Output Device) है जो सॉफ्ट कॉपी (Soft Copy) को हार्ड कॉपी (Hard Copy) में परिवर्तित (Convert) करता हैं”


Plotter:-

Plotter एक आउटपुट डिवाइस हैं इससे चित्र (Drawing), चार्ट (Chart), ग्राफ (Graph) आदि को प्रिंट किया जा सकता हैं यह 3 D Printing भी कर सकते हैं इसके द्वारा बैनर पोस्टर आदि को प्रिंट किया जा सकता हैं

“Plotter एक ऐसा आउटपुट डिवाइस हैं जो चार्ट (chart), ग्राफ (Graph), चित्र (Drawing), रेखाचित्र (Map) आदि को हार्ड कॉपी पर प्रिंट करता हैं ”


यह दो प्रकार के होते हैं

Drum pen PlotterFlat bed Plotter

Sound Card & Speaker:-

साउंड कार्ड एक विस्तारक (Expansion) बोर्ड होता है जिसका प्रयोग साउंड को सम्पादित (Transacted) करने तथा Output देने के लिए किया जाता है कंप्यूटर में गाने सुनने फिल्म देखने या गेम खेलने के लिए इसका प्रयोग किया जाना आवश्यक होता है आजकल यह Sound Card मदर बोर्ड में पूर्व निर्मित (in built) होता हैं साउंड कार्ड तथा स्पीकर एक दूसरे के पूरक होते हैं साउंड कार्ड की सहायता से ही स्पीकर ध्वनि उत्पन्न करता हैं प्राय: सभी साउंड कार्ड MIDI (Musical Instrument Digital Interface) Support करते हैं मीडी संगीत को इलेक्ट्रोनिक रूप में व्यक्त करने का एक मानक हैं साउंड कार्ड दो तरीको से डिजिटल डाटा को एनालॉग सिग्नल में बदलता हैं|


Projector:-

प्रोजेक्टर भी एक आउटपुट डिवाइस हैं प्रोजेक्टर का प्रयोग चित्र या वीडियो को एक प्रोजेक्शन स्क्रीन पर प्रदर्शित करके श्रोताओ को दिखाने के लिए किया जाता हैं|


प्रोजेक्टर निम्नलिखित प्रकार के होते हैं –

वीडियो प्रोजेक्टर     2. मूवी प्रोजेक्टर     3. स्लाइड प्रोजेक्टर

Computer Input Devices



Computer Input Devices......




“Input Device वे Device है जो हमारे निर्देशों या आदेशों को Computer  के मष्तिष्क, सी.पी.यू. (C.P.U.) तक पहुचाते हैं|”

Input Device कई प्रकार के होते है जो निम्न प्रकार है –

Keyboard

Mouse

Joystick

Trackball

Light pen

Touch screen

Digital Camera

Scanner

Digitizer

TabletBar Code Reader

OMR

OCR

MICR

ATM

की-बोर्ड (Keyboard)



की-बोर्ड कंप्यूटर का एक पेरिफेरल है जो आंशिक रूप से टाइपराइटर के की-बोर्ड की भांति होता हैं| की-बोर्ड को टेक्स्ट तथा कैरेक्टर इनपुट करने के लिये डिजाइन किया गया हैं| भौतिक रूप से, कंप्यूटर का की-बोर्ड आयताकार होता हैं| इसमें लगभग 108 Keys होती हैं| की-बोर्ड में कई प्रकार की कुंजियाँ (Keys) होती है जैसे- अक्षर (Alphabet), नंबर (Number), चिन्ह (Symbol), फंक्शन की (Function Key), एर्रो की (Arrow Key) व कुछ विशेष प्रकार की Keys भी होती हैं|


 हम की-बोर्ड की संरचना के आधार पर इसकी कुंजियो को छ: भागो में बाँट सकते है-

एल्फानुमेरिक कुंजियाँ (Alphanumeric Keys)

न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad)

फंक्शन की (Function Keys)

विशिष्ट उददेशीय कुंजियाँ (Special Purpose Keys)

मॉडिफायर कुंजियाँ (Modifier Keys)

कर्सर कुंजियाँ (Curser Keys)



एल्फानुमेरिक कुंजियाँ (Alphanumeric Keys):- Alphanumeric Keys की-बोर्ड के केन्द्र में स्थित होती हैं| Alphanumeric Keys में Alphabets (A-Z), Number (0-9), Symbol (@, #, $, %, ^, *, &, +, !, = ), होते हैं| इस खंड में अंको, चिन्हों, तथा वर्णमाला के अतिरिक्त चार कुंजियाँ Tab, Caps, Backspace तथा Enter कुछ विशिष्ट कार्यों के लिये होती हैं|

न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad):- न्यूमेरिक की-पैड (Numeric Keypad) में लगभग 17 कुंजियाँ होती हैं| जिनमे 0-9 तक के अंक, गणितीय ऑपरेटर (Mathematic operators) जैसे- +, -. *, / तथा Enter key होती हैं |

फंक्शन की (Function Keys):- की-बोर्ड के सबसे ऊपर संभवतः ये 12 फंक्शन कुंजियाँ होती हैं| जो F1, F2……..F12 तक होती हैं| ये कुंजियाँ निर्देशों को शॉट-कट के रूप में प्रयोग करने में सहायक होती हैं| इन Keys के कार्य सॉफ्टवेयर के अनुरूप बदलते रहते हैं|

विशिष्ट उददेशीय कुंजियाँ (Special Purpose Keys):- ये कुंजियाँ कुछ विशेष कार्यों को करने के लिये प्रयोग की जाती है| जैसे- Sleep, Power, Volume, Start, Shortcut, Esc, Tab, Insert, Home, End, Delete, इत्यादि| ये कुंजियाँ नये ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ विशेष कार्यों के अनुरूप होती हैं|

मॉडिफायर कुंजियाँ (Modifier Keys):- इसमें तीन कुंजियाँ होती हैं, जिनके नाम SHIFT, ALT, CTRL हैं| इनको अकेला दबाने पर कोई खास प्रयोग नहीं होता हैं, परन्तु जब अन्य किसी कुंजी के साथ इनका प्रयोग होता हैं तो ये उन कुंजियो के इनपुट को बदल देती हैं| इसलिए ये मॉडिफायर कुंजी कहलाती हैं|

कर्सर कुंजियाँ (Cursor Keys):- ये चार प्रकार की Keys होती हैं UP, DOWN, LEFT तथा RIGHT | इनका प्रयोग कर्सर को स्क्रीन पर मूव कराने के लिए किया जाता है|

की-बोर्ड के प्रकार

साधारण कीबोर्ड (Normal Keyboard)

तार रहित की-बोर्ड (Wireless Keyboard)

अरगानोमिक की-बोर्ड (Ergonomic Keyboard)

साधारण कीबोर्ड:- साधारण कीबोर्ड वे कीबोर्ड होते हैं, जो सामान्य रूप से प्रयोग (Use) किये जाते हैं, जिसे User अपने PC में प्रयोग करता हैं | इसका आकार आयताकार होता है, इसमें लगभग 108 Keys होती हैं एवं इसे Computer से Connect करने के लिए एक Cable होती हैं जिसे CPU से जोडा  जाता हैं|

तार रहित की-बोर्ड:- तार रहित की-बोर्ड (Wireless Keyboard) प्रयोक्ता (User) को की- बोर्ड में तार के प्रयोग से छुटकारा दिलाता है | कुछ कंपनियों ने तार रहित की-बोर्ड का बाजार में प्रवेश कराया है| यह की-बोर्ड सीमित दूरी तक कार्य करता है| यह तार रहित की-बोर्ड थोडा महँगा होता है तथा इसमें थोड़ी तकनीकी जटिलता होती है| इसमें तकनीकी जटिलता होने के कारण इसका प्रचलन बहुत अधिक नहीं हो पाया है|

अरगानोमिक की-बोर्ड:- बहुत सारी कंपनियों ने एक खास प्रकार के की-बोर्ड का निर्माण किया है, जो प्रयोक्ता (User) को टाइपिंग करने में दूसरे की-बोर्ड की अपेक्षा आराम देता है| ऐसे की-बोर्ड अरगानोमिक की-बोर्ड (Ergonomic Keyboard)  कहलाते है ऐसे की-बोर्ड विशेष तौर पर प्रयोक्ता (User) की कार्य क्षमता बढाने के साथ साथ लगातार टाइपिंग करने के कारण उत्पन्न होने वाले कलाई (Wrist) के दर्द को कम करने में सहायता देता है |

माउस (Mouse)


वर्तमान समय में माउस सर्वाधिक प्रचलित Pointer Device है, जिसका प्रयोग चित्र या ग्राफिक्स (Graphics) बनाने के साथ साथ किसी बटन (Button) या मेन्यू (Menu) पर क्लिक करने के लिये किया जाता है | इसकी सहायता से हम की-बोर्ड का प्रयोग किये बिना अपने पी.सी. को नियंत्रित कर सकता है |

माउस में दो या तीन बटन होते है जिनकी सहायता से कंप्यूटर को निर्देश दिये जाते है| माउस को हिलाने पर स्क्रीन पर Pointer Move करता है| माउस के नीचे की ओर रबर की गेंद (Boll)  होती है| समतल सतह पर माउस को हिलाने पर यह गेंद घुमती है|


माउस के कार्य:-

क्लिकिंग (Clicking)डबल क्लिकिंग (Double Clicking)दायाँ क्लिकिंग (Right Clicking)ड्रैगिंग (Dragging)स्क्रोलिंग (Scrolling)

माउस के प्रकार:- माउस प्रायः तीन प्रकार के होते है |

मैकेनिकल माउस (Mechanical Mouse)

प्रकाशीय माउस (Optical Mouse)

तार रहित माउस (Cordless Mouse)

मैकेनिकल माउस (Mechanical Mouse): मैकेनिकल माउस (Mechanical Mouse) वे माउस होते है| जिनके निचले भाग में एक रबर की गेंद लगी होती है जब माउस को सतह पर घुमाते है तो वह उस खोल के अंदर घुमती है माउस के अंदर गेंद के घूमने से उसके अंदर के सेन्सर्स (Censors) कंप्यूटर को संकेत (Signal) देते है

प्रकाशीय माउस (Optical Mouse):- प्रकाशीय माउस (Optical Mouse) एक नये प्रकार का नॉन मैकेनिकल (non-mechanical) माउस है | इसमें प्रकाश की एक पुंज (किरण) इसके नीचे की सतह से उत्सर्जित होती है जिसके परिवर्तन के आधार पर यह ऑब्जेक्ट (Object) की दूरी, तथा गति तय करता है |

 तार रहित माउस (Cordless Mouse):- तार रहित माउस (Cordless Mouse) वे माउस है जो आपको तार के झंझट से मुक्ति देता है| यह रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio frequency) तकनीक की सहायता से आपके कंप्यूटर को सूचना कम्युनिकेट (Communicate) करता हैं| इसमें दो मुख्य कम्पोनेंट्स ट्रांसमीटर तथा रिसीवर होते है ट्रांसमीटर माउस में होता है जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (Electromagnetic) सिग्नल (Signal) के रूप में माउस की गति तथा इसके क्लिक किये जाने की सूचना भेजता है रिसीवर जो आपके कंप्यूटर से जुड़ा होता है उस सिग्नल को प्राप्त करता है |

जॉयस्टिक (Joystick)


यह डिवाइस (Device) वीडियो गेम्स खेलने के काम आने वाला इनपुट डिवाइस (Input Device)  है इसका प्रयोग बच्चो द्वारा प्रायः कंप्यूटर पर खेल खेलने के लिये किया जाता है| क्योकि यह बच्चो को कंप्यूटर सिखाने का आसान तरीका है| वैसे तो कंप्यूटर के सारे खेल की-बोर्ड द्वारा खेले जा सकते है परन्तु कुछ खेल तेज गति से खेले जाते है उन खेलो में बच्चे अपने आप को सुबिधाजनक महसूस नहीं करते है इसलिए जॉयस्टिक का प्रयोग किया जाता है |



ट्रैकबाल (Trackball)


ट्रैक बोंल एक Pointing input Device है| जो माउस (Mouse) की तरह ही कार्य करती है | इसमें एक उभरी हुई गेंद होती है तथा कुछ बटन होते है| सामान्यतः पकड़ते समय गेंद पर आपका अंगूठा होता है तथा आपकी उंगलियों उसके बटन पर होती है| स्क्रीन पर पॉइंटर (Pointer) को घुमाने के लिये अंगूठा से उस गेंद को घुमाते है ट्रैकबोंल (Trackball) को माउस की तरह घुमाने की आवश्यकता नहीं होती इसलिये यह अपेक्षाकृत कम जगह घेरता है | इसका प्रयोग Laptop, Mobile तथा Remold में किया जाता हैं |




 लाइट पेन (Light Pen)

लाइट पेन (Light Pen) का प्रयोग कंप्यूटर स्क्रीन पर कोई चित्र या ग्राफिक्स बनाने में किया जाता है लाइट पेन में एक प्रकाश संवेदनशील कलम की तरह एक युक्ति होती है| अतः लाइट पेन का प्रयोग ऑब्जेक्ट के चयन के लिये होता है| लाइट पेन की सहायता से बनाया गया कोई भी ग्राफिक्स कंप्यूटर पर संग्रहित किया जा सकता है तथा आवश्यकतानुसार इसमें सुधार किया जा सकता है |



 टच स्क्रीन (Touch Screen)

टच स्क्रीन (Touch Screen) एक Input Device है| इसमें एक प्रकार की Display होती है| जिसकी सहायता से User किसी Pointing Device की वजह अपनी अंगुलियों को स्थित कर स्क्रीन पर मेन्यू या किसी ऑब्जेक्ट का चयन करता है| किसी User को कंप्यूटर की बहुत अधिक जानकारी न हो तो भी इसे सरलता से प्रयोग किया जा सकता है | टच स्क्रीन (Touch Screen) का प्रयोग आजकल रेलवेस्टेशन, एअरपोर्ट, अस्पताल, शोपिंग मॉल, ए.टी.ऍम. इत्यादि में होने लगा है |


बार-कोड रीडर (Bar code reader

बार-कोड रीडर (Bar code reader) का प्रयोग Product के ऊपर छपे हुए बार कोड को पढ़ने के लिये किया जाता है किसी Product के ऊपर जो Bar Code बार-कोड रीडर (Bar code reader) के द्वारा उत्पाद की कीमत तथा उससे सम्बंधित दूसरी सूचनाओ को प्राप्त किया जा सकता हैं|


 स्कैनर (Scanner)

स्केनर (Scanner) एक Input Device है ये कंप्यूटर में किसी Page पर बनी आकृति या लिखित सूचना को सीधे Computer में Input करता है इसका मुख्य लाभ यह है कि User को सूचना टाइप नहीं करनी पड़ती हैं|


ओ.एम.आर. (OMR)

ओ.एम.आर. (OMR) या ऑप्टिकल मार्क रीडर (Optical Mark Reader) एक ऐसा डिवाइस है जो किसी कागज पर पेन्सिल या पेन के चिन्ह की उपस्थिति और अनुपस्थिति को जांचता है इसमें चिन्हित कागज पर प्रकाश डाला जाता है और परावर्तित प्रकाश को जांचा जाता है| जहाँ चिन्ह उपस्थित होगा कागज के उस भाग से परावर्तित प्रकाश की तीव्रता कम होगी | ओ.एम.आर. (OMR) किसी परीक्षा की उत्तरपुस्तिका को जाँचने के लिये प्रयोग की जाती है| इन परीक्षाओं के प्रश्नपत्र में वैकल्पिक प्रश्न होते हैं |


 ओ.सी.आर. (OCR)

ऑप्टिकल कैरेक्टर रेकोग्निशन (Optical Character Recognition) अथवा ओ.सी.आर.(OCR) एक ऐसी तकनीक है | जिसका प्रयोग किसी विशेष प्रकार के चिन्ह, अक्षर, या नंबर को पढ़ने के लिये किया जाता है इन कैरेक्टर को प्रकाश स्त्रोत के द्वारा पढ़ा जा सकता हैं| ओ.सी.आर (OCR) उपकरण टाइपराइटर से छपे हुए कैरेक्टर्स, कैश रजिस्टर के कैरक्टर और क्रेडिट कार्ड के कैरेक्टर को पढ़ लेता हैं| ओ.सी.आर (OCR) के फॉण्ट कंप्यूटर में संग्रहित रहते है | जिन्हें ओ.सी.आर. (OCR) स्टैंडर्ड कहते हैं|

ए.टी.एम.(ATM)

स्वचालित मुद्रा यंत्र या ए.टी.एम. (Automatic Teller Machine) ऐसा यंत्र है जो हमे प्रायः बैंक में, शॉपिंग मौल में, रेलवे स्टेशन पर, हवाई अड्डों पर, बस स्टैंड पर, तथा अन्य महत्वपूर्ण बाजारों तथा सार्वजनिक स्थानों पर मिल जाता हैं| ए.टी.एम. की सहायता से आप पैसे जमा भी कर सकते है, निकाल भी सकते है, और बैलेंस भी चेक कर सकते है| ए.टी.एम. की सुबिधा 24 घंटे उपलब्ध रहती है|


एम.आई.सी.आर.(MICR)

मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकोग्निशन (Magnetic Ink Character Recognition) व्यापक रूप से बैंकिंग में प्रयोग होता है, जहाँ लोगो को चेकों की बड़ी संख्या के साथ काम करना होता हैं| इसे संक्षेप में एम.आई.सी.आर.(MICR) कहाँ जाता हैं| एम.आई.सी.आर (MICR) का प्रयोग चुम्बकीय स्याही (Megnatic Ink) से छपे कैरेक्टर को पढ़ने के लिये किया जाता हैं| यह मशीन तेज व स्वचलित होतीहैं साथ ही इसमें गलतियां होने के अवसर बिल्कुल न के बराबर होते हैं|




सुपर कंप्यूटर की कुछ जानकारियां super computer


सुपर कंप्यूटर की कुछ जानकारियां super computer



सुपर कंप्यूटर क्या है. यह तो आप लोगों को उसके नाम से ही पता चल गया होगा. बहुत ही ज्यादा आधुनिक और तेजी से गणना करने वाले तथा एक ही समय में बहुत से भी काम करने की क्षमता रखने वाला सुपर कंप्यूटर होता है.

सन 1980 में इंडिया के पास super computer नहीं था. उस वक्त तकनीकी युग  की शुरुआत भारत में हो चुकी थी. तथा भारत को भी अपना खुद का सुपर कंप्यूटर चाहिए था. जिस कारण उसने अमेरिका से सुपर कंप्यूटर लेना चाहा उस वक्त अमेरिका के पास अपना खुद का सुपर कंप्यूटर था. पर अमेरिका ने किसी भी तरीके से अपना सुपर कंप्यूटर भारत को देने से इनकार कर दिया. क्योंकि अमेरिका नहीं चाहता था कि कोई दूसरा देश अमेरिका की बराबरी तकनीकी रूप से कर सके. और भारत भी किसी से कम नहीं यह बताने में भारत को ज्यादा समय नहीं लगा सेंटर ऑफ डेवलपमेंट पुणे के द्वारा परम-8000  कंप्यूटर का अविष्कार करके भारत ने पूरी दुनिया को दिखा दिया. अभी अपने खुद के सुपर कंप्यूटर बनाए जा सकते हैं. और भारत द्वारा बनाए गए super computer परम 8000  को और अन्य तीन देशों में दिया गया. जिनमें रूस,uk और जर्मनी देश थे. तथा उसके पश्चात  सन 1998  मैं  सी-डैक ने एक और सुपर कंप्यूटर बनाया. और उसका नाम परम-10000  रखा गया. तथा यह कंप्यूटर एक खरब से भी ज्यादा कैलकुलेशन प्रति सेकंड में कर सकता था. और आज भारत  ने पूरे   दुनिया में सुपर कंप्यूटरों के क्षेत्र में भारत का भी नाम आता है.

 यह भी माना जाता है कि चीन में 2020 तक super computer काम करना शुरू कर देंगी. जो हर सेकंड में अरबो गणनाएं कर पाएगी. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी(एनयूडीटी)  में स्कूल ऑफ़ कंप्यूटिंग के प्रमुख ने इसकी जानकारी दी.





सुपर computer के क्षेत्र में सभी देश अलग अलग टाइप से उसे उन्नत कर रहे हैं. अमेरिका पहले ही कई सुपर कंप्यूटर बना चुका है और भारत भी क्षेत्र में कार्य कर रहा है.

Supercomputer


सुपरकंप्यूटर क्या होता है : – सुपरकंप्यूटर एक special computer है जो की general purpose computer की तुलना मे बहुत high level की calculation or computing perform कर सकता है | इसलिये ही supercomputer उस computer system को कहा जाता है जो की किसी भी समय मे सभी available computer system की तुलना मे सबसे तेज and powerful होता है | इस system को वहां पर काम मे लिया जाता है जहाँ पर बहुत ज्यादा power and fast processing के साथ साथ real time task perform करने होते है | Starting मे सुपरकंप्यूटर्स को scientific and engineering applications जिनमे बहुत ज्यादा बड़े databases and high level computation की जरुरत होती थी, मे काम मे लिया जाता था |


परम पहला भारतीय सुपर कंप्यूटर

PARAM Supercomputer in india



तकनीक की शुरूआत भारत में भले ही देरी से हुई हाे ले‍किन सुपर कंप्यूटर के क्षेञ में भारत का नाम विश्व के टॉप 10 देशों की लिस्ट में अाता है अाइये जानते हैं भारत में सुपर कंप्यूटर की शुरूआत कैसे हुई-

1980 के दशक तक भारत के पास अपना सुपर कंप्यूटर नहीं था वह ऐसा दौर था जब भारत में तकनीकी युग की शुरूआत हो चुकी थी भारत अमेरिका से सुपर कंप्यूटर लेना चाहता था ले‍किन अमेरिका ने भारत को सुपर कंप्यूटर देने से इंकार कर दिया इसके पीछे कई वजह थीं अमेरिका नहीं चाहता था कि कोई उस‍की बराबरी कर सके। लेकिन भारत में सेंटर ऑफ डेवलपमेंट पुणे द्वारा "परम-8000" कंप्यूटर बनाकर दुनियॉ को दिखा दिया कि हम भी किसी से कम नहीं इसके बाद भारत ने सुपर कंप्यूटर "परम-8000" तीन देशों जर्मनी, यूके,और रूस को दिया।इसके बाद 1998 में सी-डेक द्वारा एक सुपर कंप्यूटर और बनाया गया जिसका नाम था "परम-10000",इसकी गणना क्ष्‍मता 1 खरब गणना प्रति सेकण्ड थी  अाज भारत का विश्व में सुपर कंप्यूटर के क्षेञ में नाम है। दुनियॉ के बेहतरी सुपर कंप्यूटर की सूची बनाई गयी है जिसकी  टॉप 10 लिस्ट में भारत का नाम चौथे नंबर पर है।



भारत के अन्य सुपर कंप्यूटर - India's other supercomputer

Aaditya - आदित्य

 Anupam - अनुपम

 PARAM Yuva - परम युवा

PARAM Yuva II - परम युवा द्वितीय

 SAGA-220 - सागा 220

EKA - एका

Virgo - वर्गो

Vikram-100 - विक्रम-100

 Cray XC40 - क्रे XC40

Bhaskara - भास्कर

Pace - पेस

Flow solver - फ्लो सॉल्वर

दुनिया में सर्वश्रेष्ठ 5 सुपर कंप्यूटर की सूची - list of Best 5 supercomputers in the world


तिअन्हे-1अ (एन यू डी टी), चीन

ब्लू जीन/ एल सिस्टम (आईबीएम), यूएस

ब्लू जीन/पी सिस्टम (आईबीएम), जर्मनी

सिलिकॉन ग्राफिक्स (एसजीआई), न्यू मैक्सिको

एका, सीआरएल (आर्म ऑफ टाटा सन्स), भारत

अगर supercomputer की speed and memory की बात की जाये तो यह exceptional होती है | ये computers किसी भी काम को, उस generation के किसी भी computer की तुलना मे बहुत फ़ास्ट कर perform कर सकते है | ये ordinary personal computers की तुलना मे हज़ारो गुना fast seed से task को perform करतें है | Supercomputers arithmetic calculation बहुत फ़ास्ट परफॉर्म कर सकते है इसलिए ही इनको weather फोरकास्टिंग, code-breaking, जेनेटिक analysis and दूसरे वो काम जहाँ पर ज्यादा calculation ज्यादा होती है, use किया जाता है | Supercomputer जितना fast होगा वह उतना ही expensive होगा इसलिए supercomputers को बनाने और use करना इतना आसान नहीं होता |

सुपरकंप्यूटर की परफॉरमेंस को कैसे measure करते है : supercomputer की performance को floating-point operations per second (FLOPS) मे measure करते है जबकि ordinary computer को million instructions per second (MIPS) मे calculate किया जाता है |

Supercomputers कहाँ पर काम आता है :Supercomputers बहुत powerful ऐवम expensive होते है इसलिए इनको वही पर काम मे लिया जाता है जहाँ पर specialized applications को इनकी जरूरत होती हो | जैसे की quantum मैकेनिक्स, weather forecasting, climate research, oil and gas exploration, molecular मॉडलिंग, animated graphics, fluid dynamic calculations, nuclear energy research, and petroleum exploration etc |

Supercomputer का OS : ज्यादतर modern supercomputers Linux OS use करते है जिसमे की हर manufacturer अपनी requirement के according OS को change कर लेते है | लिनक्स के आलावा CentOS, bullx SCS, SUSE एंड Cray लिनक्स use किया जाता है |

Top500 : 1993 से सभी fastest supercomputers को उनकी स्पीड के हिसाब से ranking देना शुरू किया गया जिससे की ये जाना जा सके की पूरी दुनिया मे सभी सुपरकंप्यूटर का क्या स्टेटस है | इसके लिए top 500 list बनायीं गयी जिसमे उनक



कंप्यूटर का वर्गीकरण(Classification of computer)


कंप्यूटर का वर्गीकरण(Classification of computer)-



आज के समय में कंप्यूटर हर संभव कार्य करने में सक्षम है। कंप्यूटर के द्वारा जहाँ रोजाना का कार्य जैसे दस्तावेज तैयार करना किसी कार्य का आकलन करना आदि कार्य किये जा रहे हैँ। वहीं दूसरी ओर जटिल से जटिल बैज्ञानिक कार्य भी कंप्यूटर के द्वारा आसानी से किये जा रहे हैँ।

कंप्यूटर का वर्गीकरण अब तक संरचना , कार्य पध्दति , कार्य करने की छमता , एवम् उनके आकर और कार्य के आधार पर किया जाता रहा है। कल तक जो छमता मिनी कंप्यूटर व् वर्कस्टेशन और मेनफ्रेम कंप्यूटर की होती थी वहीँ आज का पर्सनल कंप्यूटर (PC) और अधिक सक्तिशाली हो गया है।
कंप्यूटर के कार्य करने की छमता में जितना तेजी से विकास हो रहा है उसे देखते हुए कंप्यूटर को एक वर्ग विशेष  की परिधि में सिमित करना अनुचित होगा।

कंप्यूटर को बेहतर समझने के लिए इन्हें तिन वर्गों में बाटा गया है।

1.हार्डवेयर उपयोग के आधार पर-


पहली पीढ़ी के कंप्यूटर।
दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर।
तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर।
चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर।
पाचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर।

आपको पिछली पोस्ट में कंप्यूटर की पीढ़ियों के बारे में बताया गया है आप यहाँ क्लिक करके देख सकते हैं।


2. कार्य पद्धति के आधार पर-


एनलॉग कंप्यूटर। (ANALOG COMPUTER)
डिज़िटल कंप्यूटर (DIGITAL COMPUTER)
हाइब्रिड कंप्यूटर। (HYBRID COMPUTER)


एनलॉग कंप्यूटर- (ANALOG COMPUTER)






इसमें बिद्युत के एनलॉग रूप का प्रयोग किया जाता है। इसकी गति धीमी होती है। एनलॉग कंप्यूटर अध्ययन किये जा रहे प्रणाली का एक मॉडल तैयार करता है। एनलॉग कंप्यूटर में सभी प्रचलन समान्तर तरीके से होते है। इनका प्रयोग मुख्य रूप से तकनिकी तथा वैज्ञानिक क्षेत्र में होता है।
साधारण घड़ी , वाहन का गति मीटर आदि एनलॉग कंप्यूटिंग के उदाहरण हैँ।


डिजिटल कंप्यूटर (DIGITAL COMPUTER)



डिजिटल कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक संकेतो पर चलते हैं। तथा गाड़ना के लिए द्विआधारि अंक (BINARY SYSTEM 0 या 1) पद्धति का प्रयोग किया जाता है। डिज़िटल कंप्यूटर एक ऐसा विद्युतीय गड़नात्मक उपकरण है जो संख्यात्मक और प्रतीकात्मक जानकारी को निर्दिष्ट गड़नात्मक प्रकियाओं के अनुरूप बदलता है। इनकी गति तिब्र होती है। आज के समय में प्रचलित अधिकांश कंप्यूटर इसी प्रकार के हैं। उदाहरण स्वरूप्- पर्सनल कंप्यूटर (PC)
पॉकेट कंप्यूटर , मेनफ़्रेम कंप्यूटर आदि।

हाइब्रिड कंप्यूटर (HYBRID COMPUTER)



हाइब्रिड कंप्यूटर (HYBRID COMPUTER) एनलॉग कंप्यूटर (ANALOG COMPUTER) और डिजिटल कंप्यूटर (DIGITAL COMPUTER) का मिश्रीत रूप है। हाइब्रिड कंप्यूटर में पहले एक एनलॉग कंप्यूटर का प्रयोग अग्रांत रूप से बेहतरीन लेकिन अपरिपक्व आकड़ा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। उसके बाद मिले परिणाम को डिज़िटल कंप्यूटर में वांछित विशुद्ध परिणाम पाने के लिए भरा जाता है। इसमें गाड़ना तथा प्रोसेसिंग के लिए डिज़िटल रूप का प्रयोग किया जाता है। इनपुट और आउटपुट (INPUT OUTPUT) में एनलॉग  संकेतो का उपयोग होता हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से अस्पताल रक्षा क्षेत्र व विज्ञान आदि में किया जाता है।


3. आकर और कार्य के आधार पर-

मेनफ़्रेम कंप्यूटर (MAINFRAME C.)
मिनी कंप्यूटर (MINI COMPUTER)
माइक्रो कंप्यूटर (MICRO COMPUTER)
सुपर कंप्यूटर (SUPER COMPUTER)


मेनफ़्रेम कंप्यूटर
(MAINFRAME COMPUTER)



मेनफ़्रेम कंप्यूटर आकार में काफी बड़े होते हैं।
मेनफ़्रेम कंप्यूटर में माइक्रोप्रोसेसर की संख्या भी अधिक होती है।
मेनफ़्रेम कंप्यूटर अपनी एकल संगड़नात्मक कार्यगति एवम् क्षमताओं के लिए नहीं बल्कि आंतरिक इंजियनियरिग उच्च विस्वसनीयता एवम् व्यापक सुरक्षा उत्पादन सुबिधाएं और उच्चदर्जिय उपयोग का भारी समर्थन करने के लिए माने जाते हैं।
मेनफ़्रेम कंप्यूटर के कार्य करने और संग्रहण की क्षमता अत्यंत अधिक तथा अत्यंत तिब्र होती है।
इनपर कई लोग अलग अलग कार्य कर सकते है। इनका उपयोग बड़ी कंपनिया , बैंक , अंतरिक्ष , अनुसन्धान आदि क्षेत्र में किया जाता है।


मिनी कंप्यूटर (MINI COMPUTER)



इनका आकार मेनफ़्रेम कंप्यूटर से छोटा तथा माइक्रो कंप्यूटर से बड़ा होता है। इनका आकार लगभग एक फ्रीज़ जितना होता है।
मिनी कंप्यूटर में एक से अधिक माइक्रो प्रोसेसर (MICRO PROCESSOR) का प्रयोग किया जाता है। इनकी गति तिब्र होती है। मिनी कंप्यूटर पर कई व्यक्ति एक साथ काम  सकते हैं।
इनका उपयोग मुख्य रूप से यात्री आरक्षण , बड़े ऑफिस अनुसन्धान आदि में किया जाता है।


माइक्रो कंप्यूटर (MICRO COMPUTER)


इसका विकास 1970 से प्रारम्भ हुआ जब सीपीयू (CPU) में माइक्रो प्रोसेसर का उपयोग किया जाने लगा। माइक्रो कंप्यूटर (MICRO COMPUTER) का प्रभावशाली प्रोधोगिक तकनीक , व्यक्तिगत संगड़क तथा कार्य स्थल संगड़क के पीछे प्रमुख रूप से र







Sunday, 20 August 2017

कंप्यूटर की पीढ़ीयां (Generation of Computer) 



कंप्यूटर की पीढ़ीयां (Generation of Computer)



कंप्यूटर विकास की पहली पीढ़ी (First Generation History in Hindi) :-
वैक्यूम टूयूब्स (1940 - 1956) : इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को नियंत्रण और प्रसारित करने हेतु वैक्यूम टूयूब्स का उपयोग किया गया इसमें भरी भरकम कंप्यूटर का निर्माण हुआ किन्तु सबसे पहले उन्ही के द्वारा कंप्यूटर की परिकल्पना साकार हुई | ये टूयूब्स के आकार में बड़े तथा ज्यादा गर्मी उत्पन्न करते थे तथा उनमे टूट-फुट तथा ज्यादा खराबी होने की संभावना रहती थी और इसकी गणना करने की क्षमता भी काफी कम थी और पहली पीढ़ी के कंप्यूटर ज्यादा स्थान घेरते थे.


कंप्यूटर विकास की दूसरी पीढ़ी (Second Generation History in Hindi):-
ट्रांजिस्टर (1956 - 1963) : में ट्रांजिस्टर का आविष्कार हुआ | इस दौरान के कंप्यूटरों में ट्रांजिस्टरों का एक साथ प्रयोग किया जाने लगा था, जो वाल्व्स की अपेक्षा अधिक सक्षम और सस्ते होते थे | जिन्हें कंप्यूटर निर्माण हेतु वैक्यूम टूयूब्स के स्थान पर उपयोग किया जाने लगा | ट्रांजिस्टर का आकार वैक्यूम टूयूब्स की तुलना में काफी छोटा होता है | जिससे कंप्यूटर छोटे तथा उनकी गणना करने की क्षमता अधिक और तेज | पहली पीढ़ी की तुलना में इनका आकार छोटा और कम गर्मी उत्पन्न करने वाले तथा अधिक कार्यक्षमता व तेज गति के गणना करने में सक्षम थे.


कंप्यूटर विकास की तीसरी पीढ़ी (Third Generation Computer History in Hindi):-
इंटीग्रेटेड सर्किट (1964 - 1971) : इस अवधि के कंप्यूटरो का एक साथ प्रयोग किया जा सकता था. यह समकालित चिप विकास की तीसरी पीढ़ी का महत्वपूर्ण आधार बनी, कंप्यूटर के आकार को और छोटा करने हेतु तकनिकी प्रयास किये जाते रहे जिसके परिणाम स्वरूप सिलकोन चिप पर इंटीग्रेटेड सर्किट निर्माण होने से कंप्यूटर में इनका उपयोग किया जाने लगा ! जिसके फलस्वरूप कंप्यूटर अब तक के सबसे छोटे आकार का उत्पादन करना संभव हो सका ! इनकी गति माइक्रो सेकंड से नेनो सेकंड तक की थी जो स्माल स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट के द्वारा संभव हो सका.


कंप्यूटर विकास की चोथी पीढ़ी (Fourth Generation Computer History in Hindi):-
माइक्रोप्रोसेसर (1971 - 1985) : चोथी पीढ़ी के कंप्यूटरों में माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग किया गया ! वी.एस.एल.आई. की प्राप्ति से एकल चिप हजारों ट्रांजिस्टर लगाए जा सकते थे.


कंप्यूटर विकास की पांचवी पीढ़ी (Fifth Generation Computer History in Hindi) :-
आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस: विकास की इस पांचवी अवस्था में कंप्यूटरों में कृत्रीम बुद्धि का निवेश किया गया है ! इस तरह के कंप्यूटर अभी पूरी तरह से विकशित नहीं हुए है ! इस तरह के कंप्यूटरों को हम रोबोट और विविध प्रकार के ध्वनि कार्यकर्मो में देख सकते है ! ये मानव से भी ज्यादा सक्षम होगा.


History Of Computer ( कंप्यूटर का इतिहास )


History Of Computer ( कंप्यूटर का इतिहास )



कंप्यूटर शब्द की उत्पति अंग्रेज़ी भाषा के कम्प्यूट शब्द से हुई है जिसका अर्थ है गणना करना अतः कम्प्यूटर का विकास गणितिय गणनाओं के उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया गया है सबसे पहले कंप्यूटर का आविष्कार 600 ईसा पहले गिनतारे का विकास मेसोपुटामिया में हुआ, इसी प्रकार Calculator का आविष्कार 17वीं शताब्दी के शुरुआत में डानन नेपियर ने किया था जिसका उपयोग गणितिय गणनाओं हेतु किया गया था. इसके बाद 1671 में ब्रान गोट फ्राइड में गणना करने वाले कैलकुलेटर का आविष्कार किया. 1942 में बेब्ज पास्कल ने यांत्रिक कैलकुलेटर बनाया जिसे पास्कलिंग कहा गया यह कैलकुलेटर सिर्फ 6 व्यकित्यों के बराबर गणना कर सकता था.

कंप्यूटर का इतिहास

एबेकस (abacus)



Abacus शब्द जो है वो ग्रीक शब्द ‘abax’ से आया है और जिसका मतलब होता है “calculating board” और पहला जो Abacus था वो चीन में आज से 500 ईसा पूर्व में बनाया गया था या यूँ कहे की आविष्कार हुआ था और जिस तरह के Abacus को आज हम जानते है जो कि उसका ही एक सुधरा हुआ रूप है उसे चीन में करीब सन 1300 में इस्तेमाल किया गया था | आज भी अबेकस का इस्तेमाल गणित की समस्याओं को सुलझाने में इस्तेमाल किया जाता है और सबसे अधिक जिन जगहों पर इसका इस्तेमाल होता है वो है चीन , जापान और रूस | यह एक रोचक जानकारी है कि उन देशो में आज भी इसका इस्तेमाल व्यापक तौर पर होता है |

अबेकस एक ऐसा शब्द है जो ग्रीक शब्द “अबेक्स” से आया है जिसका मतलब होता है “ गणक बोर्ड” |यह एक ऐसा ऐसा यंत्र है जिसका इस्तेमाल जोड़ , घटाव , गुना और भाग से लेकर कुछ जटिल गणित की समस्याओं को सुलझाने में भी किया जा सकता है |इसे दुनिया के पहले कंप्यूटर या कंप्यूटर की प्रेरणा के स्त्रोत के रूप में भी जाना जाता है |इसे आज भी बहुत से एशियाई देशो में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है |

महत्वपूर्ण इस्तेमाल – इसका इस्तेमाल “ मेंटल मैथ “ को विकसित करने में किया जाता है और वो यह है कि शुरू शरू में अबेकस के इस्तेमाल को करते हुए अबेकस के ब्लॉक्स सीखने वाले के दिमाग में याद हो जाते है और फिर वह Abacus के तकनीक का इस्तेमाल दिमाग में ही करते हुए गणित की समस्याओं को आसानी से हल कर सकता है |

पास्कल कैलकुलेटर (pascal calculator) or pasclain


पास्कल का कैलकुलेटर (जिसे अंकगणित मशीन या पास्कलिन भी कहा जाता है) एक यांत्रिक कैलकुलेटर है जिसे 17 वीं सदी की शुरुआत में ब्लेज़ पास्कल द्वारा आविष्कार किया गया था। पास्कल को रूऑन में कराए जाने वाले पर्यवेक्षक के रूप में अपने पिता के काम के लिए जरूरी परिश्रमी अंकगणितीय गणना द्वारा एक कैलकुलेटर विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया था। [2] उसने मशीन को दो नंबरों को जोड़ना और घटाना और दोहराया या घटाव के माध्यम से गुणा और विभाजन करने के लिए डिज़ाइन किया।


एनालेटिकल इंजन ( analytical engine )




1801 मे जोसफ मेर्री जेक्वार्ड  ने स्वचालित बुनाई मशीन का निर्माण किया . इसमें धातु के प्लेट को छेदकर पंच किया गया था और जो कपडे की बुनाई को नियंत्रित करने मे सक्षम था.

1820 मे एक अंग्रेज अविष्कारक चार्ल्स बैबेज ( charles babbage ) ने डिफरेंस engine तथा बाद मे एनालेटिकल इंजन ( analytical engine ) बनाया. चार्ल्स बैबेज के कांसेप्ट का उपयोग क्र पहला कंप्यूटर प्रोटोटाइप का निर्माण किया गया. इसी कारण चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का जन्मदाता ( father of computer )कहा जाता है. अगस्टा ने ही एक पहला demonstration program लिखा और उनके बाइनरी अर्थमेटिक के योगदान को जान वान  newmen  ने आधुनिक कंप्यूटर के विकास के लिए उपयोग किया तथा बाइनरी प्रणाली का अविष्कार किया इसीलिए अगस्टा को प्रथम प्रोग्रामर भी कहा जाता है.


herman hollerth and punch card


           
  1880 के लगभग hollerth ने पंच card का निर्माण किया जो आज के कंप्यूटर card की तरह होता था.


प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर,

ENIAC (electronic numerical integrated and calculator)





1942 हॉवर्ड university के एच्  आइकन ने एक कंप्यूटर का निर्माण किया. यह कंप्यूटर mark 1 आज के कंप्यूटर का prtotype था. 1946 मे ENIAC का निर्माण हुआ. जो पूर्णतया इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था और जिसका निर्माण pennsylvania university के J . PRECPER ECKERT और जॉन MUCHLY ने किया था.

EDSAC



यह कैम्ब्रिज university मे विकसित किया गया था

 UNIVAC -1



इसे universal automatic computer भी कहते है यह 1951 मे trading के लिए उपलब्ध प्रथम था इसमें कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी के गुण समाहित थे.








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